7 Keys to Success to Build a Successful Personality ~ Motivation Hindi

 7 Keys to Success to Build a Successful Personality

दोस्तों आज की इस वीडियो में मैं आपको बताने जा रहा हूँ | एक सफल व्यक्तित्व बनाने के लिए सफलता की 7 कुंजियाँ क्या है | 7 Keys to Success to Build a Successful Personality.

सफलता व्यक्तित्व के सहारे ही मिलती है। सफलता व्यक्तित्व के अन्दर गहरी परतों में ढँकी-छुपी रहती है। सफलता कहीं बाहर नहीं मिलती जिसे खरीद कर पाया जा सके। सफलता खदानों में दबी रहती है जिसे खोदकर एवं खरादकर ही बहुमूल्य रत्नों के रूपों में सजाया-निखारा जाता है।

मेहनत से ही व्यक्तित्व को गलाया-ढलाया जाता है, जिसकी तपन व ताप से सफलता रूपी व्यक्तित्व की मोहक सुगन्ध महक उठती है। कड़ी मेहनत, धैर्य, लगन एवं साहस के संयोग से ही सफलता का जादुई चिराग प्राप्त होता है|  जिससे सब कुछ प्राप्त किया जा सकता है।

सफल व्यक्तित्व को बनाने के लिए सफलता की 7 कुंजियाँ  हैं। यदि इन कुंजी को अपना लोगे तो तुम्हारा व्यक्तित्व चमक उठेगा। 

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व्यक्तित्व निर्माण के ये 7 कुंजियाँ हैं-

1.     प्रोएक्टिव होना:  जिसका अर्थ है अपने जीवन की पूरी जिम्मेदारी स्वयं उठाना। जब तुम यह जान लेते हो कि तुम्हारी जिंदगी की सफलता असफलता के लिए तुम स्वयं जिम्मेदार हो | तब तुम पूरी समझदारी के साथ अपने जीवन को परिवर्तित करने के लिए प्रयास करते हो | जिससे तुम अपने लक्ष्य और उद्देश्य की ओर आगे बढ़ते हैं।

 

2.     योजना बनाना :  जब तुम्हें जिम्मेदारी का ज्ञान हो जाता है तब तुम उसके लिए योजना तैयार करते हो | योजनायों के बारे में स्वामी विवेकानन्द जी कहते हैं कि शुरू में बड़ी योजनाएँ न बनाओ, धीरे-धीरे कार्य प्रारम्भ करो, जिस जमीन पर खड़े हो, उसे अच्छी तरह से पकड़कर क्रमशः ऊँचे चढ़ने का प्रयत्न करो। आपको अपने योजना की रूपरेखा अच्छी तरह पता होनी चाहिए | स्पष्ट एवं छोटी-छोटी योजनाओं को जीवन में उतारना और पूरा करना आसान होता है | जब तुम उस कार्य को पूर्ण करते हो तो तुम्हारा आत्मविश्वास बढ़ता है | और यह आत्मविश्वास तुम्हें बड़े कार्य के लिए प्रोत्साहित करता है | जिससे तुम किसी महान उदेश्य तक सफलतापूर्वक पहुँच जाते है |

 

3.     प्राथमिकता के आधार पर कार्य का निर्धारण करना: जब योजना  की रूपरेखा साफ़ होती है | तब कार्य का चुनाव करना आसान हो जाता है | कौन सा कार्य सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण है जिसे सबसे पहले करना चाहिए है, किसे इसके बाद करना है। कार्यों को सर्वप्रथम करने की प्राथमिकता एवं महत्व देने की निर्णय क्षमता ही सफलता का महान् रहस्य है। यदि कोई विद्यार्थी अपने कार्यों की प्राथमिकता का निर्धारण न कर सकें तो उनकी सफलता सदैव संदिग्ध बनी रहेगी, परन्तु आवश्यकता को ध्यान में रखकर उनके द्वारा किया गया कार्य उनकी सफलता एवं खुशहाली को सुनिश्चित कर देता है। निर्णय लेने वाला व्यक्ति पुरुषार्थी कहलाता है जो जिन्दगी की पतवार को अपने हाथों थामकर भाग्य एवं भविष्य की परवाह किये बगैर सकुशल मंजिल तक पहुँच जाता है। उसकी सोच सदा विजेता के समान होती है और सफलता उसके चरण चूमती है।

 

4.     विजेता के समान सोचना: तुम्हें हमेशा एक विजेता की तरह सोचना चाहिए | विजेता की तरह सोचने से तुम्हारे जीवन में उत्साह की वृद्धि होती है | विजेता की तरह सोचने की आदत निराशा में क्षणों में भी आशा का दीप जलाये रहती है | यही आदत तुम्हें विश्वास देती है की तुम सफलता प्राप्त करोगे | और किसी भी कीमत पर सफलता प्राप्त करके रहोगे | विजेता का यह प्रखर आत्मविश्वास तुम्हें कभी असफल नहीं होने देता है। क्या आप जानते हो नेपोलियन कभी भी नहीं शब्द सुनना पसंद नहीं करता था | विजेता पुरुषार्थी एवं पराक्रमी होता है। उसके मन में सदा ‘हाँ मैं कर सकता हूँ’ का मंत्र गूंजता रहता है |

 

5.     दूसरों को सुनने की समझदारी पैदा करना : राष्ट्र एवं विश्व में समझदार एवं सक्रिय युवाओं की घोर कमी हो गयी है। युवाओं के मजबूत एवं फौलादी कंधों पर ही किसी राष्ट्र का भार टिका रहता है। इसी उम्र में जीने की अदम्य चाहत, सीखने की अनन्त लालसा, प्राणों पर खेल जाने का जुझारूपन और महासाहस का महासमन्वय होता है। युवा व्यक्ति में ही सुनने, समझने एवं विचारने की अपार क्षमता एवं सामर्थ्य होती है। किसी भी कार्य में तल्लीनता एवं लगनशीलता एक सम्मोहक व मोहक व्यक्तित्व को जन्म देती है। यह व्यक्तित्व ही यौवन की सच्ची परिभाषा है, जो बताती है कि श्रेष्ठ, उत्कृष्ट एवं महान् लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए अभी भी प्राण, ऊर्जा एवं शक्ति सामर्थ्य चुकी नहीं है, अशेष है, जीवन्त एवं जागृत है; अभी भी जीवन के आखरी पड़ाव में समझदारी का जखीरा, लगनशीलता का भण्डार एवं जुझारूपन भरा पड़ा है। आवश्यकता है हर युवाओं में यह समझदारी की विचार तरंग हिलोरें लेने लगें, पाषाणी जड़ता में जड़ हो चुके अन्तर में पुनः जीने, सीखने की चाहत सजे और अपने एवं अपने समाज-राष्ट्र के प्रति मर-मिटने का संकल्प जगे।

 

6.     सच्चा तालमेल रखना: सच्चे तालमेल का यह भाव ही सफलता का सूत्र है, सच्चे तालमेल का विचार भाव तुम्हें आन्तरिक ऊर्जा से भर देता है और जीवन का मधुर संगीत बजने लगता है |  सच्चा तालमेल न होने के कारण ही विचारहीन एवं गलाकाट प्रतियोगिता जन्म लेती है। सच्चा तालमेल इस विषमता एवं व्यथा को दूर कर एक साथ संगठित होकर चलने की प्रेरणा एवं प्रोत्साहन देता है। सच्चे तालमेल के भाव-विचार का अंकुरण हमारी आन्तरिक चेतना में होता है। यह भावना अन्दर में उमड़ती है | सच्चा तालमेल एक ओर जहाँ व्यक्ति को विपरीत परिस्थितियों में भी एकजुट बनाये रखता है वही दूसरी ओर विकास के नये-नये आयाम खोलता है।

 

 

7.     सदैव नयापन बनाये रखना: तुम्हें हर रोज कुछ नया करने, नया सोचने तथा नयी योजना बनाने के लिए उत्साहित रहना चाहिए। जो कुछ भी तुमने किया है उसे और भी अच्छा कैसे किया जाये जा सकता है यह सोचना चाहिए | अपनी परिस्थिति एवं साधन के अनुरूप अच्छे से अच्छा करने का प्रयास करना चाहिए | इसकी प्रेरणा तुम्हें प्रतिदिन के किये गए कार्य का मूल्यांकन और आन्तरिक अवलोकन से मिलेगी। प्रतिदिन अपने कार्यों के मूल्यांकन करने से तुम्हें व्यक्तित्व की गहराई में झाँकने का अवसर मिलता है। हर दिन एक अच्छे संकल्प के साथ कार्य प्रारम्भ होता है जो सफल व्यक्तित्व की सम्मोहक विशेषता है।

 

दोस्तों सफलता के इन सात सूत्रों में व्यक्तित्व के निर्माण एवं विकास का गहरा मर्म छिपा हुआ है। इन सूत्रों को जीवन में संकल्पपूर्वक क्रियान्वित किया जाना चाहिए | जिससे तुम्हारा व्यक्तित्व का विकास होगा और वह सूरज की तरह चमकने लगेगा। ऐसे व्यक्तित्व से ही एक जीवन की शुरुआत की जा सकेगी। ये सूत्र भौतिक सफलता के साथ ही अध्यात्म जगत् में प्रवेश कराने के लिए अमोघ मंत्र साबित होंगे।

 

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1 टिप्पणियाँ

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